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मई दिवस की क्रांतिकारी परंपरा
1986Ranadive, B. T.
मई दिवस को हमारे देश में अक्सर ऐसे अवसर के रूप में लिया जाता है, जब मजदुर वर्ग की अनेक फौरी तथा आंशिक मांगें उठायी जाती हैं। लेकिन, मई दिवस की क्रांतिकारी परंपरा हमेशा से आंशिक मांगों को, मजदूर वर्ग की अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता की घोषणा और पूजीवादी व्यवस्था को खत्म करने तथा मजदूर वर्ग के पक्ष में सत्ता पर कब्जा करने में दृढ़ विश्वास व निश्चय के साथ जोड़ने की रही है।
1 Apr 1986
मजदूर-मालिक सम्बन्ध और सरकार का असली चेहरा - नए औद्योगिक सम्बन्ध विधेयक (1978) पर
1978Ranadive, B. T.
लोक सभा में 45वें संविधान संशोधन विधेयक* के दौरान औद्योगिक सम्बन्धों पर जो मजदूर वर्ग और ट्रेड यूनियन विरोधी विधेयक पेश किया गया है वह इस बात को खुले रूप में जाहिर करता है कि जनता पार्टी के नेताओं की लोकतंत्र की धारणा क्या है। 45वें संशोधन बिल को इसलिए तैयार किया गया था कि 42वें संशोधन अधिनियम के जरिये आपातकाल को जो एक पक्की बुनियाद दे दी गई थी उसे खत्म किया जा सके। इस ट्रेड यूनियन विरोधी विधेयक में दरअसल ट्रेड यूनियन आन्दोलन से संबंधित आपात-कालीन व्यवस्थाओं ओर नीतियों पर मुहर लगा दी गई है। समूचे ट्रेड यूनियन आंदोलन ने जिसमें सीटू, एटक, बी० एम० एस०, एच० एम० पी०, एच० एम० एस० और इंटक आते हैं, एक स्वर से इसकी निंदा की है और एक जुट होकर ट्रेड यूनियन आंदोलन ने इसका विरोध किया है। ऐसा हर कानून जो श्रौद्योगिक संबंधों को सुलझाने के इरादे से पेश किया जाए लेकिन जिसमें दो गैरबराबर वर्गों के अस्तित्व को मानने से इन्कार कर दिया जाय, जिनमें से एक को दूसरे के पैसे की ताकत के खिलाफ अपनी जीविका के लिए लड़ना होता है, वह दलित और शोषित वर्गों के ऊपर एकतरफा बंदिशें लगाता है और शोषण की प्रक्रिया को मदद पहुंचाता है। 'ग्रौद्योगिक संबंध' एक वर्गधारणा से शून्य मुहावरा है जिसमें वर्ग संघर्ष के कुरूप यथार्थ को और किसी सच्चे जनतंत्र के इस तकादे को दबाने और छिपाने की कोशिश की जाती है कि वह शोषकों के पंख कतरने के लिए अपनी पूरी ताकत दलित वर्गों के साँथ लगा दे। *45वें संविधान संशोधन विधेयक का अंतिम रूप से पारित होने पर नाम बदलकर 'संविधान (44वां संशोधन) अधिनियम, 1978' कर दिया गया।
1 Nov 1978
मेहनतकशों से सीटू की अपील
200915वीं लोक सभा चुनावों में वामपंथी-जनवादी एवं धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को वोट दो! यू.पी.ए. एवं एन.डी.ए. दोनों को ही शिकस्त दो! जनहितैषी विकल्प को जिताओ! 15वीं लोक सभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। मेहनतकशों के लिए, यह आम चुनाव इस नजरिए से अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि पिछले 11 वर्षों में से 6 वर्ष तक भाजपा नेतृत्व वाली एन.डी.ए. तथा 5 वर्ष के दौरान काँग्रेस नेतृत्व वाली यूपी.ए. द्वारा अपनायी गयी वैश्वीकरण की आर्थिक नीतियों के दुष्परिणामों को ध्यान में रखकर नयी सरकार का चुनाव करना है। देश के मजदूरों के समक्ष सबसे अहम् सवाल यह है कि एन.डी.ए. तथा यू पी.ए. द्वारा अपनायी गयी आर्थिक नीतियों का समर्थन करें अथवा उन्हें रद्द करके तीसरे विकल्प पर विचार करे?
1 Mar 2009
लोक सभा चुनाव: भाजपा गठबंधन को शिकस्त दो!
1999श्रमिक वर्ग को सी आइ टी यू का आह्वान और केन्द्र में भाजपा के श्रमिक विरोधी शासन की एक समीक्षा अंदर के पेजों पर 1. पुनः जनता की अदालत में 2. सी आइ टी यू ने पहले ही चेतावनी दी थी 3. राष्ट्रीय हित दांव पर 4. स्वदेशी से नकली स्वदेशी तक 5. प्रधानमंत्री का आर्थिक कार्यक्रम 6. श्रमिकों की पूर्ण उपेक्षा 7. अर्थव्यवस्था, पटरी पर या पटरी से नीचे उतरी 8. भारत बिकाऊ है! 9. फास्ट ट्रैक उदारीकरण 10. निजीकरण का उन्माद 11. विचारधारा की कड़ाई कहीं दिखाई नहीं देती 12. श्रमिकों के साथ कठोर व्यवहार 13. बी एम एस को भी सहन नहीं करते 14. अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि 15. साम्प्रदायिकता का कटटरपंथी उभार 16. भ्रामक मुखौटा 17. पोखरण के विस्फोट 18. कारगिल का पत्ता 19. योग्य प्रधानमंत्री तथा सच्चा नेता 20. भाजपा गठबंधन को पराजित करो
1 Aug 1999
सार्वजनिक क्षेत्र के खिलाफ नापाक साजिश - डॉ० अर्जुन सेनगुप्ता की अध्यक्षता में सार्वजनिक उद्यमों की नीति पुनरीक्षण समिति की रिपोर्ट
1986Ranadive, B. T., Pandhe, M. K., Sengupta, Arjun
विषय सूची I. प्राक्कथन: नई आर्थिक योजना व नीति - बी. टी. रणदिवे II. सार्वजनिक उद्योग के खिलाफ नापाक साजिश - एम. के. पंधे III. अर्जुन सेनगुप्ता समिति की रिपोर्ट 1. भूमिका 2. सार्वजनिक उद्यम और राष्ट्रीय योजना 3. सार्वजनिक उद्यमों का संगठनात्मक ढांचा 4. सार्वजनिक उद्यमों की स्वायत्तता 5. उद्यमों का उत्तरदायित्व 6. प्रौद्योगिकी का उच्च स्तर 7. घाटे वाली यूनिटों की वित्तीय लाभकारिता : पू'जी पुनर्रचना व बंद 8. सार्वजनिक उद्यमों में कीमत निर्धारण 9. अन्य मसले
1 Nov 1986
सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स का संविधान 1987
1990(बम्बई में छठे सीटू सम्मेलन, 18-22 मई 1987, द्वारा पारित संशोधन के बाद)
1 Jan 1990
हड़ताल के अधिकार की रक्षा करो !
1982Ramamurti, P.
संसद के पिछले बजट अधिवेशन में हड़ताल के अधिकार को छीनने के लिए पेश किये गये विधेयकों की समीक्षा ------------- लोकसभा के पिछले अधिवेशन की समाप्ति के समय औद्योगिक विवाद (संशोधन) विधेयक, १६८२ तथा ट्रेड यूनियन (संशोधन) विधेयक, १६८२ नामक दो विधेयक पेश किये गये। एक दूसरा विधेयक-चिकित्सालय तथा अन्य संस्थान (विवाद व्यवस्थापन) विधेयक राज्यसभा अधिवेशन के अन्तिम दिन छः मई को बहुत जल्दी-जल्दी में पेश किया गया। यह औद्योगिक विवाद (संशो-धन) विधेयक डी० एम० के० और ए० डी० एम० के० को छोड़कर जो कि इन्दिरा कांग्रेस के कृपाभाजन बनने के लिए एक-दूसरे से बाजी मार जाने की कोशिश कर रहे हैं, सम्पूर्ण विपक्ष के विरोध के बावजूद पेश किया गया है। यह सभी जानते हैं कि इससे पूर्व सितम्बर १६८१ में संसद ने "आवश्यक सेवा विधेयक" को अन्तिम रूप से पारित कर दिया था, बावजूद इसके कि इंटक को छोड़कर ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी विरोध किया, ५ लाख मजदूरों ने संसद पर इसके खिलाफ प्रदर्शन किया, तथा सम्पूर्ण विरोधपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया। इन चारों विधेयकों के माध्यम से मजदूर वर्ग पर कठोरतम हमला किया गया है, जिसका उद्देश्य है सरकार की जीहुजूरी न करने वाली ट्रेड यूनियनों को शक्तिहीन बना देना। सरकार के दुष्ट इरादों को समझने के लिए इन विधेयकों के असली अर्थ को समझना आवश्यक है ।
1 Jan 1982